स्वयं से मुक्ति
"बुधत्व कभी भी समय या स्थान में नहीं घटता. कब और कहाँ तो समय और स्थान हैं. यह तो तब घटता है, जब तुम कहीं भी नहीं होते, कुछ भी नहीं होते. वह तो समय के पार शाश्वतता में घटता है. पश्चिम के सभी बुद्धीजीवी जेन में अत्यधिक दिलचस्पी लेने लगे हैं, लेकिन उनकी रूचि बुद्धिगत ही है. उन्होंने जेन पर महान पुस्तकें लिखी हैं. जबकि जेन, बुद्धि का कोई कार्य व्यापार न होकर अमन की शून्यता है. वह है सर्वोच्च लिखावट. मैं जेन को सारभूत रूप से, स्वयं से मुक्त होना कहता हूँ. तुमने दूसरी मुक्तियों के बारे में सुना होगा, लेकिन स्वयं से मुक्त होना ही अंतिम मुक्ति है. कुछ न होते हुए, अस्तित्व को स्वयं अपनी सहजता और अपने सारे सौंदर्य के साथ अभिव्यक्त होने की अनुमति देना, लेकिन यह न तुम हो और न मैं हूँ , यह है - स्वयं अस्तित्व. यह स्वयं नृत्य करता हुआ पूरा जीवन ही अस्तित्व है. यही है जेन की घोषणा और उद्देश्य, स्वयं अपने से ही मुक्ति."
Divine knowledge!!!!!..
ReplyDeleteBahut hi badhiyan. Put more such articles and write too.
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